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Politics

सिर्फ कागजों पर चल रहा है क्वारेंटाइन करने का खेलः नियाज अहमद

कोरोना वायरस को लेकर पूरे देश में लॉक डाउन हैं। इस वजह से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली जैसे बड़े शहरों से निकलकर वापस बिहार की ओर लौटने लगे है। इसके बाद संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बिहार सरकार ने बिहार के बाहर से वापस आने वाले लोगों के लिए क्वारेंटाइन सेंटर बनाने और बाहर से आने वाले लोगों को इन सेंटरों मे 14 दिनों तक रखने का निर्देश जारी किया है। इसको लेकर आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता नियाज अहमद ने सरकार के इंतजामात को कटघरे में खड़ा किया है। 


उन्होंने कहा है कि सरकार ने अपने आदेश में क्वारेंटाइन सेंटर को सभी सुविधाओं से लैस होने की बात कही है। लेकिन धरातल पर सरकार के दावे कुछ और ही नजर आते हैं। सरकारी आंकड़ो के अनुसार 22 मार्च से अब तक बिहार में 1500 से भी अधिक प्रवासी मजदूर देश के दूसरे राज्यों से वापस आ चुके हैं। इनमें अधिकांश दिल्ली, पश्चिम बंगाल, पंजाब, राजस्थान, हैदराबाद, कर्नाटक, केरल, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई दूसरे अन्य राज्यों से शामिल हैं। प्रदेश के सरकार के निर्देश पर गौर करें तो सभी मजदूरों की स्क्रीनिंग और टेस्टिंग के बाद फिट पाए जाने के बावजूद उन्हें क्वारंटाइन सेंटर में रखा जाना था। लेकिन कई मीडिया कर्मियों की पड़ताल में सभी सरकारी दावे खोखले साबित हुए। ऐसे ही कुछ हालात जिला मुख्यालय से तकरीबन 35 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे बायसी प्रखंड के कवैया पंचायत स्थित सीमा आपदा राहत केंद्र का भी था। यहां पर प्रवासी बिहारियों को अवासन और भोजन, रेगुलर चेकअप की सुविधा की बात कही जा रही थी. लेकिन, सेंटर पर सन्नाटा पसरा नजर आया। वहाँ न प्रवासी मजदूर है न अधिकारी।


आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता नियाज अहमद ने इस विषय पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार प्रिंट मीडिया एवं  इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से प्रशासनिक अमले कि लापरवाही सामने आ रही है वो बहुत भयवाह है।


उन्होंने बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन से सभी क्वारेंटाइन सेंटरों पर कड़ी निगरानी रखने की माँग की ताकि बाहर से आ रहे प्रवासीयों से राज्य को सुरक्षित रखा जा सके।


Admin(एडमिन)

by Cityhalchal